Showing posts with label words. Show all posts
Showing posts with label words. Show all posts

Tuesday, April 24, 2012

शब्द

कुछ तेरे हैं कुछ मेरे हैं
कुछ उन लोगों ने भी बिखेरे हैं

कभी बात करते तो कभी चुप रहते हैं
कभी मेरी तो कभी तेरी कथा कहते हैं

किसी के हथियार हैं तो किसी के यार हैं
किसी के लिए अमृत तो किसी के लिए हलाहल अपार हैं

वैसे तो कागज़ पे लिखते हैं
लेकिन ये हमारे विचारों में भी बस्ते हैं

कभी इन्द्रधनुष कभी श्याम-श्वेत से प्रतीत होते हैं
थोड़ा प्रेम थोड़ी नफरत भी लेके ये चलते हैं

सत्य और असत्य भी इनसे ही बनते हैं
हर अर्थ में एक और अर्थ भी यही फूंकते हैं

हम तो केवल माध्यम हैं, लिखते हैं
ये अमर हैं हमेशा जीवंत रहते हैं

इनको, कोई मोती कोई फूल तो कोई सपने समझते हैं
आशा और निराशा की काया भी तो यही रचते हैं

इनसे खेलना आसान नहीं, ये वापस भी आते हैं
हर गुमराह को एक बार उसका चेहरा भी दिखलाते हैं

ना ये तेरे हैं ना ये मेरे हैं, ये केवल शब्द हैं शब्द
जो ना जाने किस किस ने बिखेरे हैं